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# भावनाएँ, अनुभूतियाँ, विचार और मनोदशाएँ

*चार शब्द, एक भीतरी मौसम : महसूस करना अनुमत है। हफ़्तों तक उखड़ जाना एक अलग समस्या है।*

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## 5.1 परिभाषाएँ

**चित्र 5.1** *भावनाओं का पहिया: शब्दों की बड़ी सूची भावनाओं को संभालना आसान बनाती है।*

### भावनाएँ (इमोशन)

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परिस्थितियों के प्रति स्वचालित, तीव्र प्रतिक्रियाएँ।

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सभी संस्कृतियों में समान (मूल भावनाएँ)।

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शारीरिक बदलाव शामिल होते हैं (दिल की धड़कन, चेहरे के भाव)।

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उदाहरण: डर, गुस्सा, ख़ुशी, उदासी, आश्चर्य, घृणा।

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लिम्बिक तंत्र (विशेषकर एमिग्डाला) से उत्पन्न होती हैं।

### अनुभूतियाँ (फ़ीलिंग)

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भावनाओं का सचेत अनुभव और उनकी व्याख्या।

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भावनाओं से अधिक व्यक्तिगत और निजी।

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पिछले अनुभवों और मान्यताओं से प्रभावित।

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उदाहरण: प्यार महसूस करना, ठुकराया हुआ महसूस करना, उपलब्धि महसूस करना।

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मस्तिष्क के कॉर्टिकल (सोचने वाले) भाग शामिल होते हैं।

### विचार

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मानसिक प्रक्रियाएँ, मान्यताएँ, व्याख्याएँ।

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सचेत या स्वचालित हो सकते हैं।

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प्रभावित करते हैं कि हम कैसा महसूस और व्यवहार करते हैं।

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यथार्थवादी या विकृत हो सकते हैं।

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थेरेपी और अभ्यास से बदले जा सकते हैं।

### मनोदशाएँ (मूड)

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अधिक समय तक रहने वाली भावनात्मक अवस्थाएँ (घंटों से दिनों तक)।

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भावनाओं से कम तीव्र पर अधिक स्थायी।

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प्रभावित करती हैं कि हम घटनाओं की व्याख्या कैसे करते हैं।

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उदाहरण: चिड़चिड़ी मनोदशा, उदास मनोदशा, ऊँची मनोदशा।

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नींद, हार्मोन, तनाव और स्वास्थ्य से प्रभावित।

#### भाव, मनोदशा और व्यक्तित्व

**शब्द** | **व्यावहारिक अर्थ** |

भावना | छोटी शारीरिक-और-अर्थपूर्ण घटना |
अनुभूति | सचेत अनुभव |
मनोदशा | लंबा मौसम |
भाव (अफ़ेक्ट) | सबको समेटने वाला शब्द |
व्यक्तित्व | सोचने, महसूस करने और कार्य करने का स्थिर ढर्रा |
चरित्र | व्यक्तित्व और नैतिकता |
कर्तव्य | भूमिका से बँधा “करना चाहिए” |

भावनाओं का व्यावहारिक समूह: डर, गुस्सा, उदासी, ख़ुशी, घृणा, आश्चर्य, शर्म, अपराध-बोध, प्रेम / देखभाल।

बिग फ़ाइव: खुलापन, कर्तव्यनिष्ठा, बहिर्मुखता, सहमतिशीलता, विक्षुब्धता (न्यूरोटिसिज़्म)।

क्लिनिक टिप्पणी। एक उदास दोपहर भावना है। बिना किसी आनंद के तीन खाली सप्ताह मनोदशा की समस्या है जो अवसाद हो सकती है। बीस वर्षों का संबंध बनाने का ढंग व्यक्तित्व है। चारों के लिए एक ही वाक्य का प्रयोग न करें।

## 5.2 संज्ञानात्मक त्रिकोण

विचार ↔︎ अनुभूतियाँ ↔︎ व्यवहार

**चित्र 5.2** *विचार, अनुभूतियाँ और कार्य एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।*

ये तीनों आपस में जुड़े हैं:

-

विचार अनुभूतियों को प्रभावित करते हैं: “मैं असफल हूँ” → उदासी, शर्म।

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अनुभूतियाँ विचारों को प्रभावित करती हैं: उदासी → “कुछ भी मायने नहीं रखता।”

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दोनों व्यवहार को प्रभावित करते हैं: उदासी + नकारात्मक विचार → पीछे हटना, अकेलापन।

-

व्यवहार विचारों और अनुभूतियों को प्रभावित करता है: अकेलापन → अधिक नकारात्मक विचार → गहरी उदासी।

यही संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (CBT) की नींव है: नकारात्मक सोच के ढर्रों को बदलकर हम भावनाओं और कार्यों को सुधार सकते हैं। व्यवहार बदलकर (जैसे व्यायाम, लोगों से मिलना) हम विचारों और अनुभूतियों को सुधार सकते हैं।

उदाहरण। रविवार की रात कोई सोचता है “यह सप्ताह मुझे कुचल देगा,” सीने में जकड़न महसूस करता है, सैर रद्द कर देता है, और फिर मानता है कि रद्द हुई सैर साबित करती है कि वह ख़त्म हो चुका है। एक बदला हुआ व्यवहार — फिर भी दस मिनट की सैर — अक्सर पहले विचार से बहस करने की तुलना में अगले विचार को आसानी से बदल देता है।

## 5.3 आम संज्ञानात्मक विकृतियाँ

#### सब-या-कुछ नहीं वाली सोच

चीज़ों को केवल काले और सफ़ेद खानों में देखना। उदाहरण: “अगर मैं पूर्ण नहीं हूँ, तो मैं असफल हूँ।”

#### अति-सामान्यीकरण

एक घटना से व्यापक निष्कर्ष निकालना। उदाहरण: “मैं एक बार असफल हुआ, तो हमेशा असफल रहूँगा।”

#### मानसिक छलनी

केवल नकारात्मक बातों पर ध्यान देना। उदाहरण: 9 प्रशंसाओं को अनदेखा करके 1 आलोचना पर अटके रहना।

#### सकारात्मक को नकारना

सकारात्मक अनुभवों को “गिनती में नहीं” मानकर ख़ारिज करना। उदाहरण: “उन्होंने तो बस भलमनसाहत में ऐसा कहा।”

#### जल्दबाज़ी में निष्कर्ष

मन पढ़ना: यह मान लेना कि आप जानते हैं दूसरे क्या सोचते हैं। भविष्यवाणी: यह मान लेना कि चीज़ें बुरी होंगी।

#### बढ़ा-चढ़ाकर या घटाकर देखना

बातों को अनुपात से बहुत बड़ा या छोटा कर देना। उदाहरण: “यह गलती विनाशकारी है” या “मेरी उपलब्धियाँ कोई मायने नहीं रखतीं।”

#### भावनात्मक तर्क

यह मानना कि भावनाएँ वास्तविकता दिखाती हैं। उदाहरण: “मैं मूर्ख महसूस करता हूँ, तो मैं मूर्ख ही होऊँगा।”

#### “चाहिए” वाले वाक्य

“चाहिए” के साथ खुद की या दूसरों की आलोचना करना। उदाहरण: “मुझसे कभी गलती नहीं होनी चाहिए।”

#### ठप्पा लगाना

व्यापक नकारात्मक ठप्पे लगाना। उदाहरण: “मुझसे गलती हुई” के बजाय “मैं नाकारा हूँ।”

#### व्यक्तिगत रूप से लेना

उन बातों को व्यक्तिगत रूप से लेना जो आपके बारे में नहीं हैं। उदाहरण: “मेरा दोस्त चुप है, तो ज़रूर मुझसे नाराज़ होगा।”

वाक्य लिख लें। पूछें: इसके पक्ष में क्या प्रमाण है, विरोध में क्या प्रमाण है, मैं किसी मित्र से क्या कहता? विकृति गति है, भाग्य नहीं।

## 5.4 भावनाओं को संभालने के कौशल

#### भावनाओं को पहचानें और नाम दें

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अभ्यास करें कि आप क्या महसूस कर रहे हैं, उसे पहचानें।

-

भावनाओं के लिए विशिष्ट शब्दों का प्रयोग करें (केवल “अच्छा” या “बुरा” नहीं)।

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भावनाओं से जुड़ी शारीरिक अनुभूतियों पर ध्यान दें।

#### भावनाओं को बिना आँके स्वीकार करें

-

सभी भावनाएँ वैध हैं, असहज भावनाएँ भी।

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भावनाएँ संदेशवाहक हैं, शत्रु नहीं।

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महसूस करने के लिए खुद को आँकने से बचें।

#### सामना करने की स्वस्थ रणनीतियाँ अपनाएँ

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गहरी साँस और विश्राम।

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व्यायाम और गतिविधि।

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सहारा देने वाले लोगों से बात करना।

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रचनात्मक अभिव्यक्ति (लेखन, कला, संगीत)।

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सजगता (माइंडफ़ुलनेस) और ध्यान।

#### सजगता और ग्राउंडिंग का अभ्यास करें

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वर्तमान क्षण पर ध्यान दें।

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5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग तकनीक: 5 चीज़ें जो आप देखते हैं, 4 जिन्हें छूकर महसूस करते हैं, 3 जो सुनते हैं, 2 जो सूँघते हैं, 1 जिसका स्वाद लेते हैं।

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भावनाओं को बिना अभिभूत हुए देखें।

#### ज़रूरत पड़ने पर सहारा लें

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भरोसेमंद मित्रों या परिवार से बात करें।

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पेशेवर मदद पर विचार करें।

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सहायता-समूहों से जुड़ें।

-

आपको सब कुछ अकेले नहीं संभालना है।

## 5.5 स्वस्थ बनाम अस्वस्थ सामना

**स्वस्थ** | **अस्वस्थ** |

व्यायाम | नशीले पदार्थों का दुरुपयोग |
मित्रों से बात करना | आत्म-क्षति |
डायरी लिखना | अलगाव |
ध्यान | आक्रामकता |
शौक | इनकार और टालना |
पर्याप्त नींद | अत्यधिक काम |
पेशेवर थेरेपी | अव्यवस्थित खान-पान |

क्लिनिक टिप्पणी: अस्वस्थ सामना अक्सर एक घंटे के लिए काम करता है। इसीलिए वह टिका रहता है। स्वस्थ सामना अक्सर एक सप्ताह में काम करता है। इसीलिए पहले दिन वह कमज़ोर लगता है। आत्म-क्षति और नशीले पदार्थों के लिए इच्छाशक्ति पर भाषण नहीं, पेशेवर द्वार चाहिए।

## 5.6 भावनात्मक जागरूकता: पहला कदम

जिसे आप नाम नहीं दे सकते, उसे संभाल नहीं सकते। बहुत से लोग केवल “मुझे बुरा लग रहा है” पर ध्यान देते हैं। भावना को अधिक सटीक नाम देना (उदाहरण के लिए, “मैं निराश और थोड़ा शर्मिंदा महसूस कर रहा हूँ”) मस्तिष्क पर शांत करने वाला असर डालता है, जैसा कि “अफ़ेक्ट लेबलिंग” पर शोध दिखाता है।

### भावनाओं का अपना शब्द-भंडार बढ़ाएँ

“बुरा” के बजाय आज़माएँ: चिंतित, घबराया हुआ, अभिभूत, चिढ़ा हुआ, खिन्न, आहत, अकेला, खाली, हतोत्साहित, शर्मिंदा, ईर्ष्यालु, अपराध-बोध से भरा। “अच्छा” के बजाय आज़माएँ: शांत, कृतज्ञ, गर्वित, राहत में, आशावान, संतुष्ट, उत्साहित, चंचल, जुड़ा हुआ।

### ध्यान दें कि आप इसे कहाँ महसूस करते हैं

रुककर अपने शरीर को टटोलें। सीने में जकड़न? भिंचा जबड़ा? पेट में भारीपन? शरीर के संकेत अक्सर शब्दों से पहले आते हैं।

## 5.7 ABC मॉडल: विचार अनुभूतियों को कैसे आकार देते हैं

संज्ञानात्मक थेरेपी एक सरल मॉडल सिखाती है।

-

**A: सक्रिय करने वाली घटना (Activating event)**: क्या हुआ? (“मेरी सहेली ने मेरे संदेश का जवाब नहीं दिया।”)

-

**B: मान्यता (Belief)**: मैंने खुद से क्या कहा? (“वह मुझे अनदेखा कर रही है; मैंने ज़रूर उसे नाराज़ किया होगा।”)

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**C: परिणाम (Consequence)**: मैंने कैसा महसूस किया और क्या किया? (उदास, चिंतित; मैंने तीन और संदेश भेज दिए।)

केवल घटना अनुभूति पैदा नहीं करती; उसकी **व्याख्या** करती है। एक अलग मान्यता (“शायद वह व्यस्त है”) एक अलग अनुभूति पैदा करती है।

## 5.8 विचार-अभिलेख (थॉट रिकॉर्ड)

विचार-अभिलेख कलम-काग़ज़ का एक साधन है जो इन विचारों को कार्य में बदलता है। इनके लिए स्तंभ बनाएँ:

1.

**स्थिति:** क्या हुआ?

2.

**भावना:** मैंने क्या महसूस किया, और कितनी तीव्रता से (0 से 100)?

3.

**स्वचालित विचार:** मेरे मन में क्या आया?

4.

**विचार के पक्ष में प्रमाण**

5.

**विचार के विरोध में प्रमाण**

6.

**संतुलित विचार:** अधिक निष्पक्ष, अधिक यथार्थवादी दृष्टि

7.

**अब भावना:** अनुभूति अब कितनी तीव्र है (0 से 100)?

अभ्यास के साथ आप यह मन ही मन करने लगेंगे। लक्ष्य सकारात्मक सोच नहीं, बल्कि *सटीक* सोच है।

## 5.9 सजगता (माइंडफ़ुलनेस)

सजगता का अर्थ है जानबूझकर, खुलेपन के साथ और बिना आँके वर्तमान क्षण पर ध्यान देना। यह मन को ख़ाली करने या हर समय शांत महसूस करने के बारे में नहीं है। अध्ययन दिखाते हैं कि नियमित अभ्यास तनाव घटाता है, अवसाद के लौटने को कम करता है, और ध्यान तथा भावनात्मक संतुलन सुधारता है।

### सरल अभ्यास

-

**सजग श्वास:** आराम से बैठें, साँस की अनुभूति का अनुसरण करें। जब मन भटके (वह भटकेगा), तो उसे धीरे से वापस लाएँ। तीन से पाँच मिनट से शुरू करें।

-

**बॉडी स्कैन:** ध्यान को पैर की उँगलियों से सिर तक धीरे-धीरे ले जाएँ, अनुभूतियों पर ध्यान देते हुए।

-

**सजग चलना:** हर कदम, हवा और आवाज़ों को महसूस करें।

-

**सजग भोजन:** पहले तीन कौर धीरे-धीरे लें, स्वाद और बनावट पर ध्यान दें।

-

**पाँच इंद्रियों की जाँच:** पाँच चीज़ें बताएँ जो आप देखते हैं, चार जिन्हें छूते हैं, तीन जो सुनते हैं, दो जो सूँघते हैं, एक जिसका स्वाद लेते हैं।

-

**रोज़मर्रा की सजगता:** दाँत ब्रश करना, बर्तन धोना या चाय पीना पूरे ध्यान से करें।

## 5.10 आत्म-करुणा

बहुत से लोग खुद के साथ उससे कहीं अधिक कठोर व्यवहार करते हैं जितना वे किसी मित्र के साथ करेंगे। मनोवैज्ञानिक क्रिस्टिन नेफ़ आत्म-करुणा के तीन भाग बताती हैं:

1.

**स्वयं के प्रति दयालुता:** कठोर आलोचना के बजाय खुद से गर्मजोशी से बात करना।

2.

**साझी मानवता:** याद रखना कि असफलता और पीड़ा सभी लोगों की साझा है।

3.

**सजगता:** दर्दनाक भावनाओं को बिना बढ़ा-चढ़ाए या अनदेखा किए पहचानना।

शोध पाता है कि आत्म-करुणा प्रेरणा को *नहीं* घटाती। जो लोग खुद के प्रति दयालु होते हैं, वे असफलता के बाद फिर से कोशिश करने की अधिक संभावना रखते हैं और कम चिंतित तथा अवसादग्रस्त होते हैं।

पूछें: “ऐसी स्थिति में मैं किसी करीबी मित्र से क्या कहता?” फिर वही खुद से कहें।

## 5.11 कृतज्ञता, अर्थ और शक्तियाँ

सकारात्मक मनोविज्ञान, यानी जीवन को अच्छा बनाने वाली बातों का अध्ययन, प्रमाण-आधारित आदतें बताता है:

-

**कृतज्ञता:** हर शाम तीन चीज़ें लिखें जो अच्छी रहीं और क्यों। यह सरल अभ्यास सप्ताहों में कल्याण बढ़ाता हुआ पाया गया है।

-

**दयालुता के कार्य:** किसी और के लिए कुछ अच्छा करना दोनों की मनोदशा ऊपर उठाता है।

-

**आनंद को सहेजना:** अच्छे क्षणों का आनंद लेने के लिए 30 सेकंड अधिक रुकें।

-

**अपनी शक्तियों का उपयोग:** पहचानें कि आप किसमें अच्छे हैं (दयालुता, जिज्ञासा, ईमानदारी, हास्य, लगन) और रोज़ उसका उपयोग करें।

-

**अर्थ और उद्देश्य:** मूल्यों, आस्था, परिवार, सेवा, रचनात्मकता या उन उद्देश्यों से जुड़ें जो आपके लिए मायने रखते हैं।

-

**तल्लीनता (फ़्लो):** ऐसी तल्लीन करने वाली गतिविधियाँ जो आपके कौशल को चुनौती देती हैं, जैसे संगीत, खेल, शिल्प और बागवानी, गहरी संतुष्टि देती हैं।

## 5.12 गुस्से को संभालना

गुस्सा स्वाभाविक है, और यह समस्या तब बनता है जब यह बहुत बार, बहुत तीव्र हो, या नुकसान तक ले जाए।

1.

**अपने शुरुआती संकेत पहचानें:** भिंचा जबड़ा, गर्म चेहरा, तेज़ धड़कन।

2.

**विराम लें:** 10 से 20 मिनट के लिए हट जाएँ।

3.

**अपने शरीर को ठंडा करें:** धीरे साँस लें, पानी पिएँ, टहलें।

4.

**बोलने से पहले सोचें:** पूछें कि गुस्सा वास्तव में किस बारे में है (आहत होना, डर, अन्याय?)।

5.

**“मैं” वाले वाक्यों का प्रयोग करें:** “जब योजनाएँ बिना बताए बदलती हैं तो मुझे बुरा लगता है,” न कि “तुम हमेशा...”

6.

**शांत होने पर बातचीत पर लौटें** और समस्या सुलझाने पर ध्यान दें।

7.

**मदद लें** यदि गुस्सा हिंसा, दूसरों में डर या ऐसे पछतावे तक ले जाए जिसे आप नियंत्रित नहीं कर पाते।

## 5.13 बार-बार सोचने और चिंता को संभालना

**बार-बार सोचना (रुमिनेशन)** एक ही विचारों को बार-बार दोहराना है, आमतौर पर अतीत के बारे में (“मैंने ऐसा क्यों कहा?”)। **चिंता** यही भविष्य के बारे में है। दोनों में से कोई कुछ हल नहीं करता। आज़माएँ:

-

हर दिन सीमित “चिंता का समय” तय करना

-

उसे लिख लेना, फिर नोटबुक बंद कर देना

-

अपना ध्यान किसी काम, व्यक्ति या गतिविधि पर ले जाना

-

पूछना “क्या यह उपयोगी है?” और “एक छोटा कदम क्या है?”

-

विचारों को पहचानने और छोड़ने के लिए सजगता का अभ्यास करना।

-

**एक याद-दिहानी**

-

आप अपने विचार नहीं हैं। विचार मानसिक घटनाएँ हैं जो आती-जाती रहती हैं।

-

आप किसी विचार को पहचान सकते हैं, कह सकते हैं “यह एक विचार है,” और चुन सकते हैं कि उसके पीछे जाना है या नहीं।

**इसे आज़माएँ: रात का तीन मिनट का चिंतन**

सोने से पहले उत्तर दें:

1.

आज सबसे प्रबल भावना कौन-सी थी, और उसका कारण क्या था?

2.

मैंने कैसी प्रतिक्रिया दी?

3.

एक बात क्या है जो मैंने अच्छी की?

4.

एक छोटी बात क्या है जो मैं कल अलग तरह से करना चाहूँगा? हर एक के लिए एक पंक्ति लिखें

समय के साथ आप अपनी भावनाओं और अपनी सबसे अच्छी प्रतिक्रियाओं में ढर्रे देखेंगे।

## चिंतन गतिविधि

1.

एक सप्ताह तक अपनी भावनाओं पर नज़र रखें। उन्हें क्या उकसाता है?

2.

अपनी आम संज्ञानात्मक विकृतियों को पहचानें। आप किनका सबसे अधिक प्रयोग करते हैं?

3.

हर दिन एक नकारात्मक विचार को नए ढंग से देखने का अभ्यास करें।

4.

सामना करने की 5 स्वस्थ रणनीतियाँ लिखें जो आपके लिए काम करती हैं।

5.

आपके सहारा देने वाले लोग कौन हैं? उन लोगों की सूची बनाएँ जिनसे आप बात कर सकते हैं।

## 5.14 दो कहानियाँ

साधारण जीवन की एक कहानी — रविवार रात का पैसा

एक दंपति हर रविवार पैसों को लेकर झगड़ता था। अकेले बीते शनिवार के बाद मनोदशा गिर जाती थी। अपनी मनोदशाओं को नाम देने से पैसों की समस्या हल नहीं हुई, पर इससे हर बहस उनके प्रेम की परीक्षा जैसी लगना बंद हो गई। उन्होंने हर वाक्य को प्रेम पर फ़ैसले की तरह लेना छोड़ दिया। सोमवार का एक विचार-अभिलेख एक और रविवार की अदालत से सस्ता था।

साधारण जीवन की एक कहानी — वह बच्चा जो “गुस्से” में था

वह भूखा था। चरित्र पर भाषण से अधिक रात के खाने ने सुधार किया। पहले शरीर, फिर कहानी

## 5.15 एक सहयोगी श्लोक

श्लोक / पद

**संस्कृत पाठ:**

ध्यायतो विषयान्पुंसः सङ्गस्तेषूपजायते ।

सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते ॥

क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः ।

स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति ॥

**उच्चारण:** *dhyayato visayan pumsah sangas tesupajayate | sangat sanjayate kamah kamat krodho 'bhijayate || krodhad bhavati sammohah sammohat smrti-vibhramah | smrti-bhramsad buddhi-naso buddhi-nasat pranasyati ||*

**अनुवाद:** विषयों का चिंतन करने से आसक्ति उत्पन्न होती है; आसक्ति से कामना; कामना से क्रोध। क्रोध से मोह; मोह से स्मृति का भ्रम; स्मृति के भ्रम से बुद्धि का नाश; बुद्धि के नाश से मनुष्य गिर जाता है।

**दैनिक स्वास्थ्य के लिए व्यावहारिक अर्थ:** यह एक पुरानी सीढ़ी के रूप में संज्ञानात्मक त्रिकोण है। इसे इस बात के नक्शे की तरह प्रयोग करें कि एक विचार कैसे पूरा सप्ताह बन जाता है। यह महसूस करने पर प्रतिबंध नहीं है।

*संदर्भ — भगवद्गीता 2.62–2.63*

### चिंतन

1.

इस अध्याय की कौन-सी विकृति आपके घर की सबसे प्रिय है?

2.

आज महसूस की गई एक भावना को किसी विशिष्ट शब्द में नाम दें — “ठीक” नहीं।

3.

सामना करने का कौन-सा स्वस्थ उपाय आप इस सप्ताह बनाए रखेंगे, भले ही बाकी सब छूट जाए?

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