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# तनाव और शरीर

*चेतावनी, ईंधन और बिल : शरीर वही हिसाब रखता है जो मन रखता है।*

## 7.1 तनाव क्या है?

तनाव किसी भी माँग या ख़तरे, वास्तविक या कल्पित, के प्रति शरीर और मन की प्रतिक्रिया है। उस माँग या ख़तरे को तनाव-कारक (स्ट्रेसर) कहा जाता है। तनाव-कारक बाहरी (परीक्षाएँ, झगड़े, आर्थिक समस्याएँ, बीमारी) या भीतरी (आत्म-आलोचना, पूर्णतावाद, अनसुलझा आघात, चिंता) हो सकते हैं।

**चित्र 7.1** *कुछ दबाव प्रदर्शन में मदद करता है; बहुत अधिक दबाव उसे नुकसान पहुँचाता है।*

तनाव हमेशा बुरा नहीं होता। अल्पकालिक तनाव हमें बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकता है (उदाहरण के लिए, खेल, परीक्षा या आपात स्थिति में)। समस्याएँ तब पैदा होती हैं जब तनाव पर्याप्त आराम और पुनःस्थापन के बिना बहुत तीव्र, बहुत बार-बार या बहुत लंबा हो।

## 7.2 तनाव-प्रतिक्रिया: लड़ो, भागो, जम जाओ

जब मस्तिष्क ख़तरा या अधिक माँग महसूस करता है:

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हाइपोथैलेमस सिम्पैथेटिक तंत्रिका-तंत्र को सक्रिय करता है।

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अधिवृक्क ग्रंथियाँ एड्रेनालिन और नॉरएड्रेनालिन छोड़ती हैं।

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दिल की धड़कन और साँस तेज़ होती है।

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रक्तचाप बढ़ता है।

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ऊर्जा के लिए रक्त-शर्करा बढ़ती है।

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मांसपेशियाँ तन जाती हैं।

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इंद्रियाँ अधिक तीक्ष्ण हो जाती हैं।

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पाचन और ग़ैर-ज़रूरी कार्य धीमे हो जाते हैं।

यह “लड़ो-या-भागो” प्रतिक्रिया है। कुछ स्थितियों में, विशेषकर जब बचना असंभव लगे, शरीर “जम जाने” या बंद हो जाने की अवस्था से प्रतिक्रिया दे सकता है (सुन्नता, अलगाव का अनुभव, “अटका हुआ” महसूस करना)।

यह प्रणाली हमें शारीरिक ख़तरों (उदाहरण के लिए, जंगली जानवरों) से बचाने के लिए विकसित हुई। आधुनिक जीवन में यह अक्सर मनोवैज्ञानिक तनाव-कारकों (ईमेल, समय-सीमाएँ, बहसें) के लिए सक्रिय होती है, जिन्हें लड़कर या भागकर हल नहीं किया जा सकता।

## 7.3 HPA धुरी और कोर्टिसोल

लंबे समय तक चलने वाले तनाव के लिए मस्तिष्क हाइपोथैलेमस–पिट्यूटरी–अधिवृक्क (HPA) धुरी का उपयोग करता है:

**चित्र 7.2** *अनुभूति से शरीर तक तनाव-प्रतिक्रिया।*

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हाइपोथैलेमस CRH (कॉर्टिकोट्रोपिन-रिलीज़िंग हार्मोन) छोड़ता है।

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पिट्यूटरी ग्रंथि ACTH (एड्रेनोकॉर्टिकोट्रोपिक हार्मोन) छोड़ती है।

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अधिवृक्क ग्रंथियाँ कोर्टिसोल छोड़ती हैं, जो मुख्य तनाव-हार्मोन है।

कोर्टिसोल की सामान्य भूमिका: ऊर्जा जुटाता है (रक्त-शर्करा बढ़ाता है); रोग-प्रतिरोधक कार्य को नियंत्रित करता है; रक्तचाप बनाए रखने में मदद करता है; नींद-जागरण चक्र और मनोदशा को प्रभावित करता है।

तीव्र (अल्पकालिक) कोर्टिसोल वृद्धि: तात्कालिक चुनौतियों का सामना करने में सहायक। दीर्घकालिक उच्च कोर्टिसोल: शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचा सकता है।

## 7.4 दीर्घकालिक तनाव के प्रभाव

**चित्र 7.3** *शरीर में तनाव कहाँ दिखाई देता है।*

### मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य

हिप्पोकैम्पस (स्मृति): लंबे समय तक उच्च कोर्टिसोल स्मृति बनने और याद आने को बाधित कर सकता है। ध्यान लगाने में कठिनाई और भूलने से जुड़ा।

एमिग्डाला (भय-केंद्र): अति-सक्रिय हो सकता है, जिससे चिंता, भय-प्रतिक्रियाएँ और भावनात्मक प्रतिक्रियाशीलता बढ़ती है।

प्रीफ़्रंटल कॉर्टेक्स (सोच और आत्म-नियंत्रण): कार्य घट सकता है, जिससे खराब निर्णय, आवेगशीलता और भावनाओं को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है।

मनोदशा और व्यवहार: चिंता-विकारों, अवसाद, चिड़चिड़ापन, गुस्से के विस्फोट और सामना करने के लिए नशीले पदार्थों के उपयोग का जोखिम बढ़ता है।

### शारीरिक स्वास्थ्य

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हृदय-संबंधी: उच्च रक्तचाप, तेज़ धड़कन, समय के साथ हृदय-रोग और स्ट्रोक का अधिक जोखिम।

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चयापचय: पेट की चर्बी बढ़ना, इंसुलिन प्रतिरोध, टाइप 2 मधुमेह का अधिक जोखिम।

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प्रतिरक्षा-तंत्र: शुरू में सक्रिय होता है, पर दीर्घकालिक तनाव प्रतिरक्षा को कमज़ोर कर संक्रमण बढ़ा सकता है।

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पाचन: पेट दर्द, एसिडिटी, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS), मतली, भूख में बदलाव।

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मांसपेशियाँ और दर्द: मांसपेशियों में तनाव, सिरदर्द, पीठ दर्द, शरीर में दर्द।

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नींद: नींद आने में कठिनाई, सोते रहने में कठिनाई, या ऐसी नींद जो तरोताज़ा न करे।

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प्रजनन: कामेच्छा में कमी, मासिक धर्म की अनियमितता, प्रजनन-क्षमता की समस्याएँ, इरेक्शन में कठिनाई।

इसलिए दीर्घकालिक तनाव पूरे शरीर की समस्या है, केवल मानसिक नहीं।

## 7.5 तनाव के प्रकार

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तीव्र तनाव: अल्पकालिक (मिनटों से दिनों तक)। उदाहरण: परीक्षा, साक्षात्कार, बहस, दुर्घटना से बाल-बाल बचना। अक्सर स्थिति समाप्त होते ही ख़त्म हो जाता है।

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बार-बार होने वाला तीव्र तनाव: तीव्र तनाव के लगातार प्रसंग। व्यस्त जीवनशैली, लगातार समय-सीमाओं या अधिक चिंता वाले लोगों में आम।

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दीर्घकालिक तनाव: लंबे समय तक (सप्ताह, महीने, वर्ष)। उदाहरण: लगातार आर्थिक दबाव, दुर्व्यवहार वाला संबंध, दीर्घकालिक बीमारी, देखभाल का बोझ, असुरक्षित वातावरण। स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक; अक्सर संरचित सहारे और बदलावों की ज़रूरत होती है।

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सकारात्मक तनाव (यूस्ट्रेस): चुनौतीपूर्ण पर सँभालने योग्य और सार्थक (किसी खेल का प्रशिक्षण, विवाह की तैयारी, मनचाही नौकरी शुरू करना)। विकास और प्रदर्शन को बढ़ा सकता है।

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नकारात्मक तनाव (डिस्ट्रेस): अभिभूत करने वाला, ख़तरनाक या निरर्थक। लंबा चलने पर स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने की अधिक संभावना।

## 7.6 संकेत और लक्षण

**क्षेत्र** | **उदाहरण** |

भावनात्मक | चिड़चिड़ापन, गुस्सा, उदासी, चिंता, अभिभूत महसूस करना, भावनात्मक सुन्नता |
संज्ञानात्मक | चिंता, दौड़ते विचार, ध्यान की कमी, भूलना, निर्णय न ले पाना, नकारात्मक सोच |
शारीरिक | सिरदर्द, मांसपेशियों में तनाव, थकान, नींद की समस्याएँ, पेट की समस्याएँ, धड़कन बढ़ना, भूख में बदलाव |
व्यवहारगत | पीछे हटना, टालमटोल, अधिक शराब/तंबाकू/कैफ़ीन, अत्यधिक काम, नाख़ून चबाना, बेचैनी |

हर किसी को सभी लक्षण नहीं होते। ढर्रे व्यक्ति, आयु और संस्कृति के अनुसार बदलते हैं।

## 7.7 तनाव और मानसिक विकार

दीर्घकालिक तनाव हमेशा मानसिक विकार पैदा नहीं करता, पर यह एक बड़ा जोखिम-कारक है:

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चिंता-विकार: लगातार तनाव सतर्कता और चिंता को बढ़ा सकता है, जिससे सामान्यीकृत चिंता, पैनिक डिसऑर्डर और सामाजिक चिंता में योगदान होता है।

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अवसाद: दीर्घकालिक तनाव, विशेषकर असहायता या सहारे की कमी के साथ, अवसाद पैदा कर सकता है या उसे बढ़ा सकता है।

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PTSD: गंभीर आघात (युद्ध, हमला, दुर्घटना, आपदा) के बाद होता है। लक्षणों में फ़्लैशबैक, बुरे सपने, टालना, अति-सतर्कता और भावनात्मक सुन्नता शामिल हैं।

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नशीले पदार्थों के उपयोग के विकार: कुछ लोग तनाव की “स्व-चिकित्सा” के लिए शराब, ड्रग्स या धूम्रपान का उपयोग करते हैं, जो निर्भरता तक ले जा सकता है और समय के साथ मानसिक स्वास्थ्य बिगाड़ सकता है।

शुरुआती तनाव-प्रबंधन इन स्थितियों के विकसित होने या गंभीर होने का जोखिम घटा सकता है।

## 7.8 स्तर के अनुसार प्रभाव

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हल्का: पर्याप्त आराम और सहारे के साथ कभी-कभार दबाव; चुनौतीपूर्ण पर सँभालने योग्य; दैनिक कामकाज पर बहुत कम प्रभाव।

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मध्यम: नींद, मनोदशा या ध्यान को प्रभावित करने वाला बार-बार का तनाव; काम, पढ़ाई या संबंधों पर कुछ प्रभाव; जीवनशैली में बदलाव और परामर्श बहुत सहायक हो सकते हैं।

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गंभीर: लगातार अभिभूत होने की भावना; काफ़ी हानि; संभावित चिंता या अवसाद; थेरेपी, संभावित चिकित्सीय मूल्यांकन और मज़बूत सामाजिक सहारे की ज़रूरत।

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आपात स्थिति: आत्महत्या के विचार, गंभीर घबराहट, काम न कर पाना, या हानिकारक नशीले पदार्थों का उपयोग — तुरंत पेशेवर और संभवतः आपातकालीन देखभाल।

## 7.9 तनाव सँभालने के स्वस्थ तरीके

#### शरीर-आधारित

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साँस के अभ्यास: धीमी, गहरी साँस (उदाहरण के लिए, 4 सेकंड अंदर, 6 सेकंड बाहर) पैरासिम्पैथेटिक प्रणाली को सक्रिय करती है।

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शारीरिक गतिविधि: चलना, दौड़ना, योग, नृत्य, खेल तनाव-हार्मोन घटाते हैं और एंडोर्फिन बढ़ाते हैं। अधिकांश दिनों में नियमित गतिविधि का लक्ष्य रखें।

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प्रगतिशील मांसपेशी-विश्राम: मांसपेशी-समूहों को क्रम से कसना और ढीला छोड़ना।

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नींद: नियमित समय-सारणी, अंधेरा और शांत कमरा, शाम को कम स्क्रीन। अच्छी नींद तनाव से बचाने वाले सबसे मज़बूत उपायों में से एक है।

#### मन-आधारित

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संज्ञानात्मक पुनर्रचना: विनाशकारी विचारों (“सब कुछ बर्बाद हो गया”) को पहचानें और उन्हें संतुलित विचारों (“यह कठिन है, पर मैं एक-एक कदम उठा सकता हूँ”) से बदलें।

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सजगता और ध्यान: कठोर आलोचना के बिना वर्तमान पर ध्यान; समय के साथ बार-बार सोचने को घटा सकता है।

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प्रार्थना और आध्यात्मिक अभ्यास: बहुत से लोगों के लिए आस्था, जप, धर्मग्रंथ और सत्संग (सहारा देने वाली आध्यात्मिक सभा) सुकून, अर्थ और समुदाय देते हैं।

#### सामाजिक और जीवनशैली

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सामाजिक सहारा: भरोसेमंद परिवार या मित्रों से बात करना; समूहों (खेल, शौक, आस्था, सहायता-समूह) से जुड़ना।

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समय-प्रबंधन: प्राथमिकता तय करना, बड़े कामों को बाँटना, ज़रूरत पड़ने पर “ना” कहना।

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उत्तेजकों को घटाना: अत्यधिक कैफ़ीन, निकोटीन और शराब को सीमित करना।

-

पेशेवर मदद: लगातार तनाव के लिए परामर्श या थेरेपी; गंभीर लक्षणों या नशीले पदार्थों पर निर्भरता होने पर मनोचिकित्सकीय मूल्यांकन।

## 7.10 सामना करने के अस्वस्थ तरीके

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अत्यधिक शराब, धूम्रपान या ड्रग्स का उपयोग।

-

अधिक खाना या भोजन को बहुत अधिक सीमित करना।

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आक्रामक विस्फोट या हिंसा।

-

पूरी तरह टालना (काम छोड़ना, लंबे समय तक अलग-थलग रहना)।

-

आत्म-क्षति या जोखिम भरे व्यवहार।

ये अल्पकालिक राहत दे सकते हैं, पर आमतौर पर समय के साथ तनाव, स्वास्थ्य और संबंधों को बिगाड़ते हैं। इन ढर्रों को पहचानना बदलाव की ओर पहला कदम है।

## 7.11 तनाव के आम कारण

-

**काम या पढ़ाई:** भारी कार्यभार, नौकरी की असुरक्षा, टकराव, परीक्षाएँ, पूर्णतावाद

-

**पैसा:** कर्ज़, कम आय, अप्रत्याशित ख़र्च

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**संबंध:** टकराव, अकेलापन, अलगाव, देखभाल का दायित्व

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**जीवन में बदलाव:** घर बदलना, विवाह, नया शिशु, सेवानिवृत्ति, शोक

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**स्वास्थ्य:** बीमारी, दर्द, रोग की चिंता

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**वातावरण:** शोर, भीड़, असुरक्षित पड़ोस, भेदभाव

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**सूचना का अत्यधिक बोझ:** लगातार ख़बरें और सूचनाएँ

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**भीतरी दबाव:** अवास्तविक मानक, असफलता का डर, लगातार आत्म-आलोचना

## 7.12 बर्नआउट (थकान से चूर होना)

बर्नआउट गहरी थकावट की वह अवस्था है जो लंबे समय तक बिना सँभाले काम के तनाव के बाद विकसित होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे चिकित्सीय रोग नहीं, बल्कि एक “व्यावसायिक घटना” बताता है, जिसकी तीन विशेषताएँ हैं:

1.

**थकावट:** निचुड़ा हुआ महसूस करना, ऊर्जा ख़त्म।

2.

**निराशावाद या दूरी:** नौकरी, लोगों या कामों के प्रति नकारात्मक या कटा हुआ महसूस करना।

3.

**घटी हुई प्रभावशीलता:** कम सक्षम और कम उत्पादक महसूस करना।

बर्नआउट किसी को भी हो सकता है, पर यह स्वास्थ्य-सेवा, शिक्षण, सामाजिक कार्य, देखभाल और ऐसी किसी भी नौकरी में आम है जिसमें माँग अधिक और नियंत्रण कम हो। यह अवसाद से मेल खाता है, और यदि लक्षण गंभीर हों या लंबे चलें, तो पेशेवर मूल्यांकन महत्वपूर्ण है।

**चेतावनी**

बर्नआउट केवल एक सप्ताहांत की छुट्टी से शायद ही सुधरता है। स्थायी सुधार के लिए आमतौर पर बदलाव चाहिए: यथार्थवादी कार्यभार, स्पष्ट सीमाएँ, प्रबंधकों का सहयोग, नियमित विराम, और कभी-कभी उपचार।

## 7.13 तनाव बनाम चिंता

दोनों आपस में मिलते हैं, पर एक अंतर है:

-

**तनाव** आमतौर पर किसी *पहचाने जा सकने वाले बाहरी दबाव* की प्रतिक्रिया है, और दबाव समाप्त होने पर यह घटने लगता है।

-

**चिंता** लगातार बनी रहने वाली फ़िक्र या डर है जो अक्सर किसी स्पष्ट कारण के बिना भी चलती रहती है और जिसमें इस बात का डर हो सकता है कि क्या *हो सकता है*।

लंबा तनाव चिंता-विकार या अवसाद तक ले जा सकता है। अगले दो अध्याय इन स्थितियों को समझाते हैं।

## 7.14 समायोजन विकार (एडजस्टमेंट डिसऑर्डर)

कभी-कभी जीवन का कोई बड़ा बदलाव, जैसे तलाक़, नौकरी छूटना या कोई गंभीर निदान, ऐसी तनाव-प्रतिक्रियाएँ जगाता है जो अपेक्षा से अधिक तीव्र या लंबी होती हैं और दैनिक जीवन में बाधा डालती हैं। जब लक्षण तनाव-कारक के लगभग तीन महीने के भीतर प्रकट हों और उसके अनुपात से अधिक हों, तो डॉक्टर इसे *समायोजन विकार* कह सकते हैं। यह आमतौर पर सहारे, सामना करने के कौशल और समय से, और कभी-कभी संक्षिप्त थेरेपी से सुधरता है।

## 7.15 तनाव के बारे में अलग ढंग से सोचना

शोध बताता है कि तनाव के बारे में हमारी मान्यताएँ मायने रखती हैं। जो लोग तनाव को केवल हानिकारक मानते हैं, वे उन लोगों से बुरा महसूस करते हैं जो इसे इस संकेत के रूप में देखते हैं कि शरीर चुनौती का सामना करने की तैयारी कर रहा है। खुद से कहना “मेरा दिल इसलिए धड़क रहा है क्योंकि मेरा शरीर तैयार हो रहा है” आपके अनुभव को डर से तत्परता में बदल सकता है। इसका अर्थ गंभीर तनाव को अनदेखा करना नहीं है; इसका अर्थ है कि तनाव-प्रतिक्रिया स्वयं आपकी शत्रु नहीं है।

साधारण जीवन की एक कहानी — मीरा, आयु 38

मीरा लंबे घंटे काम करती थी, बूढ़े होते माता-पिता की देखभाल करती थी और घर सँभालती थी। वह हड़बड़ी और तनाव में रहती थी। वह देर से सोती, भोजन छोड़ देती, और कई कप चाय और कॉफ़ी पीती। समय के साथ उसे सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, खराब नींद और बार-बार बहसें होने लगीं। वह सोचती, “यही मेरा जीवन है; मुझे इसे सहना होगा।”

एक सहेली ने परामर्शदाता का सुझाव दिया। उन्होंने मुख्य तनाव-कारकों और सामना करने के अनुपयोगी तरीकों (अधिक कैफ़ीन, कोई विराम नहीं, हर बात पर हाँ कहना) को नाम दिया। मीरा ने शाम को 20 मिनट की सैर, सोने से पहले साँस का अभ्यास, काम पर एक छोटा विराम, कुछ ज़िम्मेदारियाँ बाँटना, और दोपहर के बाद चाय-कॉफ़ी घटाना शुरू किया।

कुछ ही सप्ताहों में उसकी नींद सुधरी, सिरदर्द घटे और उसे अधिक नियंत्रण महसूस हुआ। उसे एहसास हुआ: “मैं सारा तनाव दूर नहीं कर सकती, पर मैं अपनी प्रतिक्रिया बदल सकती हूँ और सहारा बना सकती हूँ।”

**7.16 एक सरल कहानी**

## 7.16 एक सहयोगी श्लोक

श्लोक / पद

**संस्कृत पाठ:**

मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः ।

आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत ॥

**उच्चारण:**

*matra-sparsas tu kaunteya sitosna-sukha-duhkha-dah |*

*agamapayino 'nityas tams titiksasva bharata ||*

**अनुवाद:** संसार के संपर्क सर्दी और गर्मी, सुख और दुःख देते हैं। वे आते-जाते हैं; वे स्थायी नहीं हैं। हे भारत, उन्हें सहन करो।

**दैनिक स्वास्थ्य के लिए व्यावहारिक अर्थ: मनोवैज्ञानिक इसे “कष्ट सहन करने की क्षमता” (डिस्ट्रेस टॉलरेंस) कहते हैं। तितिक्षा का अर्थ है किसी कठिन भावना, जैसे चिंता, गुस्सा या उदासी, के साथ शांति से बैठना और बिना घबराए उसे उठने और उतरने देना।**

फिर भी, सहन करने का अर्थ खुद को सज़ा देना नहीं है। *तितिक्षा* का अर्थ है भावना की लहर गुज़रते समय वर्तमान में बने रहना; यह भावनात्मक रूप से सुन्न हो जाने की माँग नहीं है। इसके अलावा, दर्द सहने का अर्थ यह नहीं कि आपको समस्या की जड़ ठीक करने से मना किया गया है (जैसे काम पर ईमेल के कुचल देने वाले बोझ को घटाना या किसी बुरे वातावरण को छोड़ना)। अंत में, याद रखें कि तनाव सहना शारीरिक श्रम है। आपके शरीर की तनाव-प्रतिक्रिया प्रणाली (HPA धुरी) आपको दिन भर चलाने के लिए भारी ईंधन जलाती है, इसलिए सच्ची सहनशीलता के लिए हमेशा उबरने हेतु गहरी, शारीरिक नींद चाहिए।

*संदर्भ — भगवद्गीता 2.14*

### चिंतन गतिविधि

1.

इस समय आपके शीर्ष तीन तनाव-कारक क्या हैं (काम, परिवार, पैसा, स्वास्थ्य, पढ़ाई)?

2.

तनाव आमतौर पर आपके शरीर और व्यवहार में कैसे दिखता है (सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, अधिक खाना, अलग-थलग रहना)?

3.

इस अध्याय से तनाव-प्रबंधन का एक स्वस्थ अभ्यास चुनें। इस सप्ताह आप इसे कब और कैसे करेंगे?

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